किसी के हाथ से पहनी न शिव ने माला भी

तुम्हारा रास्ता तकता है वो शिवाला भी

उसे हुई भी मुहब्बत तो मुझ-से बेदिल से
शरीफ़ लड़की थी इक साल उस को टाला भी

मैं इश्क़ कर तो रहा हूँ ये दूसरा लेकिन
गले में अटका है पहले का इक निवाला भी

ज़मीनदार का लड़का हूँ ऐ परी-रू मैं
सभी से गाँव में रौशन दिमाग वाला भी

तेरी नज़र जो झुकी दीप भी हुए मद्धम
तेरा मिज़ाज समझता है ये उजाला भी

तुम्हारे इश्क़ के ग़म निकले जान के दुश्मन
इन आंधियों में उड़ा रूह का दुशाला भी

— Vishnu virat

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