tum phir se poochhti na mujhe kya main theek hooñ | तुम फिर से पूछती न मुझे क्या मैं ठीक हूँ

  - Vishnu virat

तुम फिर से पूछती न मुझे क्या मैं ठीक हूँ
झुँझला के कह दिया था कि अच्छा मैं ठीक हूँ

हैरान हूँ कि अपनों की लाशों को देखकर
होता नहीं है कोई भी जितना मैं ठीक हूँ

हर इक दवा फ़ुज़ूल थी बेकार हर इलाज
फिर एक रोज़ ख़ुदस ही सोचा मैं ठीक हूँ

कमरे में किस दरार से आई ये छिपकली
कोई चलो ये देखने आया मैं ठीक हूँ

ये सोचता हूँ पुल से नदी देखते हुए
ए काश एक बार तो लगता मैं ठीक हूँ

मैं जानता हूँ आपकी जो फ़िक्र है मगर
मैं कह रहा हूँ आपसे बाबा मैं ठीक हूँ

  - Vishnu virat

Dariya Shayari

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