बच्चों के होंठ पर भी उदासी का नाम था

ये रोग मेरे गाँव की फसलों में आम था

उस को चुरा लिया है किसी शेरसाज़ ने
वो शख़्स मेरे इश्क़ का पहला कलाम था

बरसों रही थी क़ैद वो मुझ बुत के इश्क़ में
मज़हब में जिस के बुत से निभाना हराम था

तुम आ गई तो ये भी बग़ावत पे तुल गया
पहले तो मेरा मन मेरा अच्छा ग़ुलाम था

उस की भी रेल आ गई थी ठीक वक़्त पर
बदक़िस्मती मेरी भी कि सड़कों पे जाम था

उस की ज़रा सी बात से क़िस्सा हुआ शुरू
सुनिए 'विराट' आप से छोटा सा काम था

— Vishnu virat

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