ab mohabbat vo kahii aur nibhaata hogaa | अब मोहब्बत वो कहीं और निभाता होगा

  - ALI ZUHRI

अब मोहब्बत वो कहीं और निभाता होगा
किसी जंगल में नया पेड़ लगाता होगा

किस क़दर शौक़ है आँखों में बसे रहने का
जाने किसको वो हसीं ख़्वाब दिखाता होगा

उसके कानों की वो बाली भी चमकती होगी
और कंगन से वो लोगों को लुभाता होगा

मुझको देकर के गया है ग़म-ए-हिज्राँ अपना
मेरे हिस्से की ख़ुशी किस पे लुटाता होगा

उसकी आदत है बिना बात के ग़ुस्सा करना
कौन उसके ये सभी नाज़ उठाता होगा

पूछता होगा मेरा हाल-ए-फ़ुसूँ लोगों से
मेरी हालत पे भी अफ़सोस जताता होगा

अपने साए पे उसे शर्म तो आती होगी
और शीशे में नया चेहरा सताता होगा

यूँँ अचानक से न मिल जाऊँ कहीं पर उसको
राह से जाते हुए मुँह को छुपाता होगा

  - ALI ZUHRI

Narazgi Shayari

Our suggestion based on your choice

More by ALI ZUHRI

As you were reading Shayari by ALI ZUHRI

Similar Writers

our suggestion based on ALI ZUHRI

Similar Moods

As you were reading Narazgi Shayari Shayari