baar hi baar mere dil ne jasaarat ki hai | बार ही बार मेरे दिल ने जसारत की है

  - ALI ZUHRI

बार ही बार मेरे दिल ने जसारत की है
बाद तेरे भी जो तुझ सेे ही मोहब्बत की है

कोशिशें करता रहा तुझको भुलाने की मगर
इसी उलझन में तेरी और भी चाहत की है

मुझको आदम ने सिखाएं हैं अदब हव्वा के
इस वजह से तेरी नादानी की इज़्ज़त की है

चलो दुनिया तो किसी तौर से दुनिया थी मगर
कुछ ख़ुदा ने भी मेरे साथ शरारत की है

जिन फ़रिश्तों को बिठाया था सदा काँधो पर
उन फ़रिश्तों ने सर ए हश्र शिकायत की है

हर किसी को है मेरे हाल से शिकवा ज़ुहरी
किस क़दर मेरी जवानी की फ़ज़ीहत की है

  - ALI ZUHRI

Beqarari Shayari

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