बाग़ों से पीले फूलों की रंगत चुराएगीफिर अपने सुर्ख़ होंटों पे तितली बिठाएगीग़ुस्से में देख कर उसे महसूस ये हुआहिंदा के जैसे मेरा कलेजा चबाएगी— ALI ZUHRI