हमें भी तो रस्ता दिखाओ कोई
किधर जाना है ये बताओ कोई
ये जितने भी दिल टूटे आशिक़ हैं ना
इन्हें शे'र कहना सिखाओ कोई
उसे बोलते देखना है मुझे
उसे बातों में तो लगाओ कोई
हमें जिस्म की कोई ख़्वाहिश नहीं
यहाँ से ये कचरा हटाओ कोई
मोहब्बत में हारे हुए हैं ये लोग
जो जीते हैं उन से मिलाओ कोई
बहारें फिर इक बार आने को हैं
नया फूल फिर से खिलाओ कोई
— Yuvraj Singh Faujdar















