ज़िन्दगी ज़ख़्मों से सजाई है
तब कहीं जाके रास आई है
मेरा सय्याद अगर तू है तो फिर
मुझ को ये क़ैद भी रिहाई है
रूह पाकीज़ा हो गई है मेरी
रूह में जब से तू समाई है
एक लड़की को पाने की ख़ातिर
शहर भर से मेरी लड़ाई है
अजनबी हो गया है सारा शहर
एक बस तुम से आशनाई है
चाँद पूनम का अब तो देखने दो
कल मेरे चाँद की विदाई है
— Yuvraj Singh Faujdar















