नस्री-नज़्म
"फूल मुरझा रहे हैं "
मैं ने उसे देखा था
मुलाक़ात से पहले
उदास झील के दूसरे किनारे पर
आसमाँ में
जहाँ अफ़्सुर्दा लोग अक्सर चले आते हैं
ख़्वाब के ज़रिए
उस से क़ुर्बत होने पर
ख़्वाब के दरीचे से
लौट कर हक़ीक़त में
हम ने फूल लगाए थे
उन फूलों की ख़ुशबू से
झील की याद नहीं आई
वैसे ख़्वाब नहीं आए
लेकिन वक़्त गुज़रने पर
देख-रेख उन फूलों की
उस ने मेरे सुपुर्द की
मैं ने उस के सुपुर्द की
और अब इतने सालों बा'द
मैं ने उसे फिर देखा है
उदास झील के दूसरे किनारे पर
आसमाँ में
जहाँ अफ़्सुर्दा लोग अक्सर चले आते हैं
ख़्वाब के ज़रिए
— ZARKHEZ















