सुन मेरे ऐ प्यारे रब
सुन मेरे ऐ प्यारे रब
सारी मुश्किल कर दे हल
तू तो वाक़िफ़ है कैसे
कटता है मेरा हर पल
फ़िक्र-ए-फ़र्दा या तंगी
मर्ज़-ए-तन या मजबूरी
मुश्किल मुश्किल हर-सू है
कितनी क़िस्में हैं इस की
माना इन सब के पीछे
कुछ तो बेहतर ही होगा
मेरी भी ख़ातिर तू ने
कुछ है बेहतर ही सोचा
पर फिर भी घबराए जी
जब सोचूँ मैं मुस्तक़बिल
आँखें हो जाती हैं नम
अंदर से जलता है दिल
चारो जानिब तारीकी
दिखती है मुझ को जब जब
दिल तब तब ये कहता है
सुन मेरे ऐ प्यारे रब
— Zaan Farzaan















