मोहब्बत में वफ़ादारी भी होती
मगर हम में अदाकारी भी होती
दुपट्टा भी छुपा देता तिरा मैं
कोई तो चोर अलमारी भी होती
लगा देते तिरी तस्वीर दिल पे
मिली ऐसी कलाकारी भी होती
बचा लेते वो अपना घर उजड़ते
पिताजी में समझदारी भी होती
ख़ुदा देता उसे गर एक बेटा
सो उस से दोस्ती यारी भी होती
फ़िदा होता मिरा बेटा भी उस की
अगर बेटी कोई प्यारी भी होती
बना लेते हम अपनी एक सरकार
हमें आती जो ग़द्दारी भी होती
खिला देता जो मैं थोड़ी सी रिश्वत
मिरी तनख़्वाह सरकारी भी होती
— ZafarAli Memon















