waqt-be-waqt usko bulaayaa nahin | वक़्त-बे-वक़्त उसको बुलाया नहीं

  - Shubham Rai 'shubh'

वक़्त-बे-वक़्त उसको बुलाया नहीं
शख़्स जो साथ मेरा निभाया नहीं

साथ उसके बिना हम चले थे मगर
रास्ते ने भी मुझको गिराया नहीं

जिस ज़माने से डरते रहे उम्र भर
उस ज़माने ने अपना बनाया नहीं

वो भी इल्ज़ाम मुझपे लगाते रहे
इक घड़ी साथ जिसने बिताया नहीं

तीर इतने सहे तंज़ के दोस्तों
वक़्त आया तो हमने चलाया नहीं

हार मिलती अगर,सब सुनाते मुझे
जीत पर कोई मुझको सराहा नहीं

  - Shubham Rai 'shubh'

Haar Shayari

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