आग के शो'ले उतारो हल्क़ में
गाड़ दो कीलें धड़कती छातियों में
डाल दो गर्दन में फंदे रस्सियों के
क़त्ल कर लो ख़ून की नदियाँ बहा लो
हो निहत्ता कोई तो गोली चला लो
फिर भी हो कोई कसर तो पूरी कर लो
जीत का एलान कर दो
फिर भी तुम डरते रहोगे
और हर युग में तुम्हारी हार ही होती रहेगी
फिर भी तुम चेहरे बदल कर हर ज़माने में रहोगे
और सदियों तक
यही इक सिलसिला चलता रहेगा
— Aabid Adeeb















