पहले होगी, उसूलों की अब अहमियत कुछ नहीं
काम पैसों से गर बनता है तो ग़लत कुछ नहीं
कूड़ा जोड़ा है और कूड़े की अहमियत कुछ नहीं
असलियत में तेरे पास में मिलकियत कुछ नहीं
सच्चिदानंद हम तो थे हैं और रहेंगे सदा
फक्कड़ों के वनस्पत तेरी हैसियत कुछ नहीं
आज-कल हाल ऐसे हैं स्कूल-कॉलेज के
फ़ीस तगड़ी है, मिलती मगर तर्बियत कुछ नहीं
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