देख कर मुस्कुराना शर्माना
इश्क़ समझे न कोई दीवाना
है क़यामत हर इक अदा इन की
ज़ुल्फ़ें बिखराना हो या झटकाना
सिर्फ़ आता है इन हसीनों को
दिल चुराना चुरा के ले जाना
क्यूँ किसी का यूँ दिल जलाते हो
क्यूँ बनाते हो यूँ ही दीवाना
कितना मुश्किल है चाहतों में सनम
पास रह कर भी दूर हो जाना
बे-क़रारी में आहें भरता है
जी न पाता है कोई दीवाना
साल-हा-साल लम्हा-दर-लम्हा
जलता रहता है दिल का वीराना
ज़िंदा रहना हो इक सज़ा जैसे
साँस लेना हो कोई ज़ुर्माना
हम ने माना कि दिल है दीवाना
कोई अपना है कोई बेगाना
रात है रात कब गुज़रती है
रोज़ भरते हैं कितना हर्ज़ाना
यक-ब-यक चौंक जाते हैं अक्सर
देख कर खाली-खाली सिरहाना
हर किसी पर ही इक ख़ुमारी है
हर किसी आँख में है मयखाना
दर्द आ कर ठहर-सा जाता है
दर्द अपना हो या हो बेगाना
दिल हुआ इश्क़ में तमाम 'आज़ी'
फिर भी क्यूँ ख़ूँ चकाँ है अफ़साना















