dekh kar muskurana sharmaana | देख कर मुस्कुराना शर्माना

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

देख कर मुस्कुराना शर्माना 'इश्क़ समझे न कोई दीवाना

है क़यामत हर इक अदा इनकी
ज़ुल्फ़ें बिखराना हो या झटकाना

सिर्फ़ आता है इन हसीनों को
दिल चुराना चुरा के ले जाना

क्यूँ किसी का यूँँ दिल जलाते हो
क्यूँ बनाते हो यूँँ ही दीवाना

कितना मुश्किल है चाहतों में सनम
पास रहकर भी दूर हो जाना

बे-क़रारी में आहें भरता है
जी न पाता है कोई दीवाना

साल-हा-साल लम्हा-दर-लम्हा
जलता रहता है दिल का वीराना

ज़िंदा रहना हो इक सज़ा जैसे
साँस लेना हो कोई ज़ुर्माना

हम ने माना कि दिल है दीवाना
कोई अपना है कोई बेगाना

रात है रात कब गुज़रती है
रोज़ भरते हैं कितना हर्ज़ाना

यक-ब-यक चौंक जाते हैं अक्सर
देख कर खाली-खाली सिरहाना

कोई शम्मा है कोई परवाना
कोई पागल है कोई मस्ताना

हर किसी पर ही इक ख़ुमारी है
हर किसी आँख में है मयखाना

दर्द आकर ठहर-सा जाता है
दर्द अपना हो या हो बेगाना

दिल हुआ 'इश्क़ में तमाम 'आज़ी'
फिर भी क्यूँ ख़ूँ चकाँ है अफ़साना

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

Ishq Shayari

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