hamaari zindagi kuchh aise yaar guzri hai | हमारी ज़िंदगी कुछ ऐसे यार गुज़री है

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

हमारी ज़िंदगी कुछ ऐसे यार गुज़री है
के जैसे आह में छुपके पुकार गुज़री है

अभी अभी तो बदन का शबाब उतरा है
अभी अभी तो चमन से बहार गुज़री है

तुम्हारी मस्त निगाही की हर अदा क़ातिल
हमारे दिल के सनम आर पार गुज़री है

तुम्हारी दूरियाँ खलती रहीं हमें पल पल
तुम्हारे साथ शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है

हमीं ने शाद की ये ज़िंदगी ख़लाओं से
हमीं को जान ए जाँ ये ना-गवार गुज़री है

हर एक ख़्वाब मिरा अधपका रहा यारो
हर एक चाह मिरी बेक़रार गुज़री है

हमारे ज़ख़्म कभी भर न पाएँगे आज़ी
हमारे जिस्म से ऐसी कटार गुज़री है

  - Ajeetendra Aazi Tamaam

Aah Shayari

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