आप का रोज़ नाम लूँगा मैं
आपसे प्यार भी करूँगा मैं
पीठ पीछे न वार करता हूँ
हर जगह सामने मिलूँगा मैं
घूम कर देख ले जहाॅं चाहे
अब कहीं भी नहीं मिलूँगा मैं
ऐ ख़ुदा तू जहाॅं नहीं होगा
देख लेना वहीं मिलूँगा मैं
वो जहाॅं छोड़ कर गया था तू
शर्त रख ले वहीं मिलूँगा मैं
राह में फूल आएँ या काँटे
मुस्कुराते हुए चलूँगा मैं
सामने क्यूँ मिरे नहीं आती
देख कर तुझ को जी उठूँगा मैं
हर ख़ुशी में तिरी ख़ुशी है मिरी
कौन कहता है जल उठूँगा मैं
ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं तो क्या
ज़िंदगी से गले मिलूँगा मैं
ख़ुल्द दोज़ख़ दुकान हो या घर
तू जहाॅं जाएगा चलूँगा मैं
ज़िंदगी से मुझे नहीं है प्यार
तू रहेगी तो ही रहूँगा मैं
प्यार से बात वो करे न करे
प्यार की बात तो करूँगा मैं
अपनी मर्ज़ी का मैं तो मालिक हूँ
यूँ जिया हूँ यूँ ही जिऊँगा मैं















