साथ माँगू तो मुझे मशवरा देते हैं लोग
इतना हँसते हैं कि मुझ को रुला देते हैं लोग
हुस्न वालों से बहुत बच के निकलता हूँ अब
बिना बातों के बतंगड़ बना देते हैं लोग
भूक लत्ते ये सभी ज़ख़्म छुपा लेता हूँ
अरे पगड़ी भी हवा में उला देते हैं लोग
इतना मासूम न बन क़त्ल मिरा कर के तू
जिस को चाहे उसे मुजरिम बना देते हैं लोग
मैं तो पत्थर ही उठाने के लिए आता हूँ
मुझे रस्ते से तो फिर क्यूँ हटा देते हैं लोग
— Prashant Kumar















