वो मिरे साथ में ही रहता है
फिर भी तो ग़ैर मुझे कहता है
दिल के इस पार तो दुनिया है ही
दिल के उस पार कोई रहता है
बे-वफ़ाई न करोगे मुझ से
जब भी मिलता है यही कहता है
तुम परेशान हो इस दुनिया से
मेरे अंदर भी कोई रहता है
दिल की चौखट पे खड़ा है कोई
उस से पूछो तो कहाँ रहता है
सब मोहब्बत को सज़ा कहते हैं
वो मोहब्बत को मज़ा कहता है
गाल नोचेगा कभी चूमेगा
मेरे पीछे ही पड़ा रहता है
— Prashant Kumar















