दिख रहा हर तरफ़ ग़म का साया मुझे
तुम ने छोड़ा नहीं तुम ने मारा मुझे
होती ग़ज़लें नहीं अब मुकम्मल मिरी
याद आते नहीं तुम है शिकवा मुझे
तेरी यादों से अब ये भरे हैं नहीं
लगता दुश्मन है मेरा ही बस्ता मुझे
था पता मुझ को इक दिन चली जाओगी
बस इसी दर्द का पहले डर था मुझे
हाए कैसे जिया हूँ मैं इन सालों में
मुझ-सा लगता न कोई बेचारा मुझे
है शिकायत मुझे अब दरीचों से भी
तेरा चेहरा न अब तक दिखाया मुझे
— Aditya Choudhary















