log mar jaane ke phir baad kidhar jaate hain | लोग मर जाने के फिर बाद किधर जाते हैं

  - Faiz Ahmad

लोग मर जाने के फिर बाद किधर जाते हैं
हम यही जान ने की ज़िद में गुज़र जाते हैं

इस मोहब्बत ने दिखाए हैं कुछ इतने कम ज़र्फ़
ज़बाँ क्या चीज़ वो वादों से मुकर जाते हैं

ये अलग बात कि पत्थर हो गए हैं फिर भी
हम तुझे आज भी देखे है तो मर जाते हैं

उस को देखूँ हूँ तो बिनाई बड़ी जाती है
उस की तस्वीर से सब ज़ख़्म निख़र जाते हैं

यादें काटों की तरह चुभती है दिल में हर रोज़
रोज़ हम कांँच के मानिंद बिख़र जाते हैं

राएगाँ मानता हूँ उन सभी की ज़िन्दगी को
लोग जो तुझको बिना देखे ही मर जाते हैं

गर निकाले है हमें दिल से तो फिर ये भी बता
यहाँ से निकले हुए ख़्वार किधर जाते हैं

  - Faiz Ahmad

Mehboob Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Faiz Ahmad

As you were reading Shayari by Faiz Ahmad

Similar Writers

our suggestion based on Faiz Ahmad

Similar Moods

As you were reading Mehboob Shayari Shayari