अपनी पहचान भी अब तुम सेे कराऊँ मैं भी
दिल की हर बात को क्यूँँं तुम सेे बताऊँ मैं भी
तू जो रुसवा करे जाता है ज़माने में मुझे
तेरी ख़ातिर जो लगे ज़ख़्म दिखाऊँ मैं भी
वैसे तो राज़ हूँ इक पर है ये ख़्वाहिश मेरी
जाने तू मुझ सेे तो सब राज़ बताऊँ मैं भी
तेरी महफ़िल में खटकती है कमी शायर की
दे इजाज़त कि तिरी बज़्म में आऊँ मैं भी
क्या हुआ है तिरे जाने से मिरे दिल का हाल
तू अगर पूछे जो दिल से तो सुनाऊँ मैं भी
हर कोई तुझको सुनाए चला जाता है यहाँ
है तमन्ना के ग़ज़ल तुझको सुनाऊँ मैं भी
ये सियासत की रिवायत है तो होती होगी
क्या अब इस दुनिया को आपस में लड़ाऊँ मैं भी
तुमने मुँह फेर लिया मेरी मोहब्बत से तो ठीक
पर ये न हुक्म करो तुमको भुलाऊँ मैं भी
है तो काफ़ी ही नज़र उसकी नशे के लिए पर
वो इशारा जो करे जाम उठाऊँ मैं भी
ये ज़रूरी नहीं उसको भी मोहब्बत हो 'फ़ैज़'
सब मिरे साथ हुआ है ये बताऊँ मैं भी
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