शुरू में दोस्त बता कर यक़ीं दिला के मुझे
लिपट रही है अब उस से दिखा दिखा के मुझे
कुछ इस क़दर नज़र-अंदाज़ करता है मुझे दिल
तुम्हारी याद में खो जाता है भुला के मुझे
जो रोया करती थी बस बात पर जुदाई की
वो आज हस रही है सामने रुला के मुझे
ये कब पता था कि मुझ को तबाह कर देगी
बड़ी सज़ा मिली हल्का सा मुस्कुरा के मुझे
— Faiz Ahmad















