tumhein KHuda se shikaayat kabhi na ho dua hai | तुम्हें ख़ुदास शिकायत कभी न हो दुआ है

  - Faiz Ahmad

तुम्हें ख़ुदास शिकायत कभी न हो दुआ है
तुम्हारे दिल पे क़यामत कभी न हो दुआ है

मुझे पता है के फिर किस तरह गुज़रती है
तिरे नसीब में फुरक़त कभी न हो दुआ है

बिछड़ के जाना के हम है नहीं तिरे काबिल
सो तुम को हम से मोहब्बत कभी न हो दुआ है

लगे न दाग़ कोई आके तेरे दामन पर
के तुझपे कोई भी तोहमत कभी न हो दुआ है

दुआ है हो सदा इलहाम तुमपे ख़ुशियों का
तुम्हें गमो की बशारत कभी न हो दुआ है

उतर ही जाए नशा जिसका कुछ महीनों में
अब ऐसी तुमको मोहब्बत कभी न हो दुआ है

रहे हमेशा खड़ा तेरे साथ तेरा ख़ुदा
तुम्हें हमारी ज़रूरत कभी न हो दुआ है

  - Faiz Ahmad

Ibaadat Shayari

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