दिल-ए-नादाँ को अक़्ल दे रहा हूँमय को मरहम की शक़्ल दे रहा हूँजो मोहब्बत पनप रही मुझ मेंउसे नफ़रत की शक़्ल दे रहा हूँ— Faiz Ahmad