zameen par aasmaan kab tak rahega | ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा

  - Ajmal Siraj

ज़मीं पर आसमाँ कब तक रहेगा
ये हैरत का मकाँ कब तक रहेगा

नज़र कब आश्ना-ए-रंग होगी
तमाशा-ए-ख़िज़ाँ कब तक रहेगा

रहेगी गर्मी-ए-अनफ़ास कब तक
रगों में ख़ूँ रवाँ कब तक रहेगा

हक़ीक़त कब असर-अंदाज़ होगी
ख़सारे में जहाँ कब तक रहेगा

बदल जाएँगे ये दिन रात 'अजमल'
कोई ना-मेहरबाँ कब तक रहेगा

  - Ajmal Siraj

Nigaah Shayari

Our suggestion based on your choice

    हम जिसे देखते रहते थे उम्र भर
    काश वो इक नज़र देखता हम को भी
    Mohsin Ahmad Khan
    हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
    हर किसी की नज़र नहीं होती
    Ibn E Insha
    27 Likes
    शाम थी हिज्र की हाल मत पूछना
    आँख थकने लगे तो जिगर रो पड़े
    Piyush Mishra 'Aab'
    सुखा ली सबने ही आँखे हवा ए ज़िन्दगी से
    यहां अब भी वही रोना रुलाना चल रहा है
    Farhat Ehsaas
    33 Likes
    चुरायगा उसी से आंख कातिल
    ज़रा सी जान जिस बिस्मिल में होगी
    Dagh Dehlvi
    41 Likes
    आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था
    एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
    Tehzeeb Hafi
    220 Likes
    तेरी तस्वीर हट जाएगी लेकिन
    नज़र दीवार पर जाती रहेगी
    Tehzeeb Hafi
    86 Likes
    सखी को हमारी नज़र लग न जाए
    उसे ख़्वाब में रात भर देखते हैं
    Sahil Verma
    25 Likes
    ये इम्तियाज़ ज़रूरी है अब इबादत में
    वही दुआ जो नज़र कर रही है लब भी करें
    Abhishek shukla
    25 Likes
    मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
    सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है
    Nazeer Akbarabadi
    21 Likes

More by Ajmal Siraj

As you were reading Shayari by Ajmal Siraj

    गुज़र गई है अभी साअत-ए-गुज़िश्ता भी
    नज़र उठा कि गुज़र जाएगा ये लम्हा भी

    बहुत क़रीब से हो कर गुज़र गई दुनिया
    बहुत क़रीब से देखा है ये तमाशा भी

    गुज़र रहे हैं जो बार-ए-नज़र उठाए हुए
    ये लोग महव-ए-तमाशा भी हैं तमाशा भी

    वो दिन भी थे कि तिरी ख़्वाब-गीं निगाहों से
    पुकारती थी मुझे ज़िंदगी भी दुनिया भी

    जो बे-सबाती-ए-आलम पे बहस थी सर-ए-बज़्म
    मैं चुप रहा कि मुझे याद था वो चेहरा भी

    कभी तो चाँद भी उतरेगा दिल के आँगन में
    कभी तो मौज में आएगा ये किनारा भी

    निकाल दिल से गए मौसमों की याद 'अजमल'
    तिरी तलाश में इमरोज़ भी है फ़र्दा भी
    Read Full
    Ajmal Siraj
    हम समझते थे कि हम उसको भुला सकते हैं
    वो समझता था हमें भूल नहीं पाएगा वो
    Ajmal Siraj
    किसी की क़ैद से आज़ाद हो के रह गए हैं
    तबाह हो गए बर्बाद हो के रह गए हैं

    अब और क्या हो तमन्ना-ए-वस्ल का अंजाम
    दिल ओ दिमाग़ तिरी याद हो के रह गए हैं

    कहें तो क़िस्सा-ए-अहवाल मुख़्तसर ये है
    हम अपने इश्क़ की रूदाद हो के रह गए हैं

    किसी की याद दिलों का क़रार ठहरी है
    किसी के ज़िक्र से दिल शाद हो के रह गए हैं

    तिरे हुज़ूर जो रश्क-ए-बहार थे 'अजमल'
    ख़राब-ओ-ख़्वार तिरे ब'अद हो के रह गए हैं
    Read Full
    Ajmal Siraj
    नज़र आ रहे हैं जो तन्हा से हम
    सो यूँ है कि भर पाए दुनिया से हम

    न पर्वा हमें हाल-ए-बेहाल की
    न शर्मिंदा उम्र-ए-गुज़िश्ता से हम

    भला कोई करता है मुर्दों से बात
    कहें क्या दिल-ए-बे-तमन्ना से हम

    नज़र में है जब से सरापा तिरा
    जभी से हैं कुछ बे-सर-ओ-पा से हम

    कोई जल-परी क्या परी भी न आई
    मगर ख़ुश हुए रात दरिया से हम

    तमाशाई शश-जिहत हैं सो हैं
    ख़ुद अपने लिए भी तमाशा से हम

    समझना था दुनिया को यूँ भी मुहाल
    समझते थे दुनिया को दुनिया से हम
    Read Full
    Ajmal Siraj
    सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की
    मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिस के भरने की

    हमारे सर पे तो ये आसमान टूट पड़ा
    घड़ी जब आई सितारों से माँग भरने की

    गिरह में दाम तो रखते हैं ज़हर खाने को
    ये और बात कि फ़ुर्सत नहीं है मरने की

    बहुत मलाल है तुझ को न देख पाने का
    बहुत ख़ुशी है तिरी राह से गुज़रने की

    बताओ तुम से कहाँ राब्ता किया जाए
    कभी जो तुम से ज़रूरत हो बात करने की
    Read Full
    Ajmal Siraj

Similar Writers

our suggestion based on Ajmal Siraj

Similar Moods

As you were reading Nigaah Shayari Shayari