वोजिसकेहिस्सेमेंदर्द-ए-जिगरनहींआता
उसआदमीकीदु'आमेंअसरनहींआता
मैंआइनाहूँजोदेखूँगावोदिखाऊँगा
फ़रेबदेनेकामुझकोहुनरनहींआता
ग़ुबार-ए-राहसेबचबचकेचलनेवालोंको
तमामउम्रशुऊर-ए-सफ़रनहींआता
दयार-ए-ज़ीस्तकोक्याहोगयाकिदूरतलक
उदासियोंकेसिवाकुछनज़रनहींआता
हुकूमतेंमिरीउँगलीपेरक़्सकरतीहैं
येक्याकहाकिमुझेकुछहुनरनहींआता
येवक़्तऐसापरिंदाहैजोकिऐ'अख़्तर'
जोउड़गयातोकभीलौटकरनहींआता