जो कुछ न हो सका फ़रियाद कर के रोऊँगा
मैं अपने आप को आबाद कर के रोऊँगा
सभी ने मेरी ख़लिश से है ज़िंदगी पाई
तो आज ख़ुद को मैं नशाद कर के रोऊँगा
रक़ीब माँग रहा था ख़ुशी के पल मुझ से
मैं आज उस की इमदाद कर के रोऊँगा
शगुफ़्तगी कभी मेरे लिए बनी ही नहीं
तो आज कर्ब को इजाद कर के रोऊँगा
— Parwez Akhtar















