मैं अपनी दु'आओं में असर ढूँडता रहाउसमें छुपा जो ज़र था वो ज़र ढूँडता रहानाकामियों में मैं ने गुज़ारी है ज़िन्दगीनाकामियों में अपना हुनर ढूँडता रहा— Parwez Akhtar