उम्र जब तक जहान में गुज़रे
पर तिरे दरमियान में गुज़रे
दर गुज़र करना आदतें मेरी
कोई लग़्ज़िश जो ध्यान में गुज़रे
सादगी आदमी की ज़ीनत है
तो भला क्यूँ गुमान में गुज़रे
यार सौ झूठ से ये अफ़ज़ल है
एक सच वो जो मान में गुजरे
— Aktar ali
पर तिरे दरमियान में गुज़रे
दर गुज़र करना आदतें मेरी
कोई लग़्ज़िश जो ध्यान में गुज़रे
सादगी आदमी की ज़ीनत है
तो भला क्यूँ गुमान में गुज़रे
यार सौ झूठ से ये अफ़ज़ल है
एक सच वो जो मान में गुजरे
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