अरे क्या सीख सकोगे भला हिजरत से हमारी
तुम लोग मज़ा लेते हो हालत से हमारी
हम कौन हैं ये बात तुम्हें लिख के बताएं
अंदाज़ा नहीं होता शबाहत से हमारी
बेसुध नहीं राएगा हो जाना हमारा
कुछ फूल खिले हैं तो मशक़्क़त से हमारी
— Ali Zaryoun
तुम लोग मज़ा लेते हो हालत से हमारी
हम कौन हैं ये बात तुम्हें लिख के बताएं
अंदाज़ा नहीं होता शबाहत से हमारी
बेसुध नहीं राएगा हो जाना हमारा
कुछ फूल खिले हैं तो मशक़्क़त से हमारी
Other ghazal from the same pen
Shers of gulshan.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling