शाहसाज़ी में रियायत भी नही करते हो
सामने आके हुकूमत भी नही करते हो
तुमसे क्या बात करे कौन कहाँ क़त्ल हुआ
तुम तो इस ज़ुल्म पे हैरत भी नही करते हो
अब मेरे हाल पे क्यों तुमको परेशानी है
अब तो तुम मुझसे मुहब्बत भी नही करते हो
प्यार करने की सनद कैसे तुम्हे जारी करूँ
तुम अभी ठीक से नफ़रत भी नही करते हो
मश्वरे हँस के दिया करते थे दीवानों को
क्या हुआ अब तो नसीहत भी नही करते हो
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