ham aise buzdilon ki maan saanee | हम ऐसे बुज़दिलों की मान साँई

  - Aman Mishra 'Anant'

हम ऐसे बुज़दिलों की मान साँई
तो कर दे रात का ऐलान साँई

मैं दो आँखों में पढ़कर आ गया हूँ
तेरी धरती का सारा ज्ञान साँई

बड़ी बिटिया का मंडप सज रहा था
अचानक आ गया तूफ़ान साँई

उसे अम्मी की धमकी खा गई थी
पिता जी के हमें अरमान साँई

हैं पंडित हम मगर रोज़े रखे थे
था इक मरयम पे यूँँ ईमान साँई

ले दे देना किसी हारे हुए को
ले मैं ने दान कर दी जान साँई

थी इनके बिन भी क़ुदरत ख़ूबसूरत
बनाए किस लिए इंसान साँई

वो जैसे इक कोई परमाणु बम थी
मैं पैंतालीस का जापान साँई

  - Aman Mishra 'Anant'

Tamanna Shayari

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