जब मेरे साथ
पेड़ झूम उठते हैं देख के
धूप की चमक कम हो जाती है
फूल खिलते हैं देख के
डाल के हाथों में हाथ बैठती हो जब
याद रहे अगली बार जब मिलें तो
कलाइयों पर घड़ी नहीं होगी
घड़ी से बिल्कुल सहा नहीं जाता
तुम मेरे साथ बैठती हो जब
— Aman Deep singh
पेड़ झूम उठते हैं देख के
धूप की चमक कम हो जाती है
फूल खिलते हैं देख के
डाल के हाथों में हाथ बैठती हो जब
याद रहे अगली बार जब मिलें तो
कलाइयों पर घड़ी नहीं होगी
घड़ी से बिल्कुल सहा नहीं जाता
तुम मेरे साथ बैठती हो जब
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