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अब असीरी की ये तदबीर हुई जाती है  - Ambreen Haseeb Ambar

अब असीरी की ये तदबीर हुई जाती है
एक ख़ुश्बू मिरी ज़ंजीर हुई जाती है

इक हसीं ख़्वाब कि आँखों से निकलता ही नहीं
एक वहशत है कि ता'बीर हुई जाती है

उस की पोशाक निगाहों का अजब है ये फ़ुसूँ
ख़ुश-बयानी मिरी तस्वीर हुई जाती है

अब वो दीदार मयस्सर है न क़ुर्बत न सुख़न
इक जुदाई है जो तक़दीर हुई जाती है

उन को अशआर न समझें कहीं दुनिया वाले
ये तो हसरत है जो तहरीर हुई जाती है

- Ambreen Haseeb Ambar

Khushboo Shayari

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