ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबास पहले
वो ख़ुद को सब कुछ समझ रहा था वबास पहले
पलक झपकते ही सारा मंज़र बदल गया है
यहाँ तो मेला लगा हुआ था वबास पहले
तुम आज हाथों से दूरियाँ नापते हो सोचो
दिलों में किस दर्जा फ़ासला था वबास पहले
अजीब सी दौड़ में सब ऐसे लगे हुए थे
मकाँ मकीनों को ढूँढ़ता था वबास पहले
हम आज ख़ल्वत में इस ज़माने को रो रहे हैं
वो जिस से सब को बहुत गिला था वबास पहले
न जाने क्यूँ आ गया दुआ में मिरी वो बच्चा
सड़क पे जो फूल बेचता था वबास पहले
दुआ को उट्ठे हैं हाथ 'अंबर' तो ध्यान आया
ये आसमाँ सुर्ख़ हो चुका था वबास पहले
— Ambreen Haseeb Ambar















