zameen pe insaan KHuda banaa tha vaba se pahle | ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबास पहले

  - Ambreen Haseeb Ambar

ज़मीं पे इंसाँ ख़ुदा बना था वबास पहले
वो ख़ुद को सब कुछ समझ रहा था वबास पहले

पलक झपकते ही सारा मंज़र बदल गया है
यहाँ तो मेला लगा हुआ था वबास पहले

तुम आज हाथों से दूरियाँ नापते हो सोचो
दिलों में किस दर्जा फ़ासला था वबास पहले

अजीब सी दौड़ में सब ऐसे लगे हुए थे
मकाँ मकीनों को ढूँढता था वबास पहले

हम आज ख़ल्वत में इस ज़माने को रो रहे हैं
वो जिस से सब को बहुत गिला था वबास पहले

न जाने क्यूँ आ गया दुआ में मिरी वो बच्चा
सड़क पे जो फूल बेचता था वबास पहले

दुआ को उट्ठे हैं हाथ 'अंबर' तो ध्यान आया
ये आसमाँ सुर्ख़ हो चुका था वबास पहले

  - Ambreen Haseeb Ambar

Gulshan Shayari

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