वो भीगना मेरा बारिश में इक बहाना था

छलक गया था इक आँसू वही छुपाना था

हमारा रिश्ता बस इक खेल बन गया जिस में
बस एक दूजे को हर हाल में हराना था

ज़रा नज़र ही तो डाली थी हम ने माज़ी पर
लिपट गईं वही यादें जिन्हें भुलाना था

अजब नहीं जो अलग हो गए वो मिलते ही
कभी तो रंग हिना का भी छूट जाना था

मुझे पता ही न था हार ही चुकी हूँ मैं
हर एक वार ही उस का तो ग़ाएबाना था

— Ameeta Parsuram Meeta

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