न खोना और न पाना चाहिए था
मुझे कुछ दरमियाना चाहिए था
मिरे आगे थे दुनिया के सवालात
तुम्हें ही आगे आना चाहिए था
मिले बेबाक जैसे कुछ नहीं हो
ज़रा सा हिचकिचाना चाहिए था
ग़ज़ल मैं कह चुका था जब तुम आए
तुम्हें मतले' में आना चाहिए था
समय के साथ भर जाता है हर ज़ख़्म
समय से भाग जाना चाहिए था
ख़तों का क्या था बह जाते नदी में
तुम्हें तो बस बहाना चाहिए था
— Amit Bajaj















