kis ko kis ka saath nibh | किस को किस का साथ निभाना होता है

  - Amit Bajaj

किस को किस का साथ निभाना होता है
वक़्त की रौ का सिर्फ़ बहाना होता है

पहले एक तजस्सुस बनता है हम को
फिर हालात का ताना-बाना होता है

मैं बच्चों की बातें ग़ौर से सुनता हूँ
इन बातों से ज़ेहन सियाना होता है

धड़कन तो बस सीने का दिल रखती है
दिल का कोई और ठिकाना होता है

एक हक़ीक़त की बस एक झलक के लिए
कितने ख़्वाबों को टकराना होता है

हम जल कर अतराफ़ को रौशन करते हैं
उन को बस खिड़की तक आना होता है

  - Amit Bajaj

Waqt Shayari

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