गुज़िश्ता दौर के सारे यहाँ फ़रहाद बैठे हैंमुहब्बत देख ली कर के सभी बर्बाद बैठे हैंअभी नादान हो प्यारे यहाँ पर इल्म मत बाँटोयहाँ जितने भी बैठे है सभी उस्ताद बैठे हैं— Amit Maulik