कुछ अधूरे से फ़साने रह गए हैं
ख़्वाब आधे ही हमारे रह गए हैं
वक़्त ने जब भी हराया हैं हमें याँ
हम हँसे और मुस्कुराते रह गए हैं
वक़्त ने सब कुछ भुला डाला है फिर भी
हम उसी लम्हे के मारे रह गए हैं
तू गया तो रौशनी भी छिन गई है
हम अँधेरों के सहारे रह गए हैं
— amit kumar gangle















