न जाने किन अदावतों के हम शिकार हो गएकि दिल को साफ़ रक्खा तो गुनाहगार हो गएज़माना चाहता था हम भी उन के रंग में ढलेहम अपने रंग में रहे तो दाग़दार हो गए— Amit Nandan Dev