हम से अच्छी-अच्छी बातें करती है
यानी वो बस ख़ुद की बातें करती है
बर्तन भी तो धोने होते हैं उस को
सो वो जल्दी-जल्दी बातें करती है
मानो कोई कोयल जैसे गाती हो
हाँ वो बिल्कुल ऐसी बातें करती है
ग़ुस्सा जब ज़्यादा चढ़ जाता है उसको
मरने मर जाने की बातें करती है
ज़्यादा ही बातें करते हैं हम उस सेे
जैसे माँ से मौसी बातें करती है
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