kuchh der tak vo mujhko nihaara chala gaya | कुछ देर तक वो मुझको निहारा, चला गया

  - Amritanshu Sharma

कुछ देर तक वो मुझको निहारा, चला गया
कल सुब्ह मेरी आँख का तारा चला गया

वो ख़ुश हुआ कि उसको ख़सारा नहीं हुआ
मैं रो रहा था मेरा सहारा चला गया

सबने कहा लो फैसला ऐसा कि जो टिके
ये क्या कि उसने फिर से पुकारा, चला गया

उसने मुझे बताया भी हम थोड़ी दूर हैं
थोड़ा सा कहते कहते वो सारा चला गया

आया था सोचकर वो कि हो बात बाम पर
मैं चुप रहा तो उठके सितारा चला गया

एक आदमी रहा तो ली मौसम ने करवटें
एक आदमी गया कि नज़ारा चला गया

वो कह रहा था मान जा ए दोस्त, बात कर
मेरा था जिसके साथ गुज़ारा, चला गया

ये एसी मुश्किलें हैं कि जिनके न हल मिले
मैं कोस कर भी ख़ुद को दुबारा चला गया

बात आ गई थी दोस्ती रख लो या 'इश्क़ लो
मैंने सिरा बचाया, किनारा चला गया

वो पूछते हैं कब ख़ुदा आया है फर्श पर
हमने कहा की तुमको उतारा चला गया

हम रो रहे हैं उसको, जिसे कोई ग़म नहीं
उसका तो कुछ नहीं था, हमारा चला गया

  - Amritanshu Sharma

Dard Shayari

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