कुछ अगर करना हो तो भला कीजिए
दो दिलों को कभी मत जुदा कीजिए
जो मोहब्बत में सरहद बने फिरते हैं
आप थोड़ा ख़ुदा से डरा कीजिए
मेरी ग़ज़लों में अब वो अज़िय्यत नहीं
मेरा दिल फिर से टूटे दुआ कीजिए
रास आने लगे हैं सभी ग़म मुझे
फिर सितम कोई मुझ पर नया कीजिए
आप मुझ से न पूछे कि मैं कैसा हूँ
मैं नहीं जानता ख़ुद पता कीजिए
कल मेरे साथ इक हादसा हो गया
इश्क़ कहने लगा ख़ुश रहा कीजिए
शा'इरी करने से घर नहीं चलते हैं
आप कुछ काम भी तो किया कीजिए
यूँ बहुत वक़्त बर्बाद हो जाएगा
आप 'रेहान' को अब दफ़ा कीजिए
— Rehaan















