मिली जिन से जफ़ाएँ उन को भी आदाब करना थाहर इक पत्थर हुए दिल को पुनः मेहताब करना थासितम क्या है कि ख़ुद बेज़ार बैठा है वो लड़का आजजिसे कल ग़ैर की बस्ती को भी शादाब करना था— Rehaan