Rehaan
Rehaan
Nazm

"बिन तेरे"

मुझे जीना है बिन तेरे ये सच अपना नहीं सकता
बिछड़ कर तुझ से वापस ख़ुद को भी अब पा नहीं सकता
मोहब्बत एक ऐसा ग़म है जो सब को रुलाता है
मैं कितना रोया तड़पा हूँ तुझे समझा नहीं सकता
तेरी हर याद काँटों की तरह दिल को दुखाती है
मैं कितने दर्द में हूँ ये तुझे बतला नहीं सकता

तेरा चेहरा मेरी आँखों में अब हर पल झलकता है
तेरे ख़्वाबों में ही जानाँ मेरा हर दिन गुज़रता है
भले तुझ से न कह पाया मैं अपने दिल की बातें पर
मैं कितना चाहता हूँ तुझ को मेरा दिल समझता है
ख़ुदा से अब ये ख़्वाहिश है कि तू बस मेरी हो जाए
तेरे बिन जीना नामुमकिन ये दिल तुझ पे ही मरता है

— Rehaan

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