
है घर कपड़ा है रोटी भी मगर फिर भी ग़रीबी है
न उस की कुछ तवज्जोह जो मेरी सब से क़रीबी है
उसे मुझ से शिकायत है कि उस को भूल बैठा हूँ
ये मेरी ख़ुश-नसीबी है या मेरी बद-नसीबी है
— Rehaan
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