bhule se bhi lab par sukhun apna nahin aata | भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता

  - Anand Narayan Mulla

भूले से भी लब पर सुख़न अपना नहीं आता
हाँ हाँ मुझे दुनिया में पनपना नहीं आता

दिल को सर-ए-उल्फ़त भी है रुस्वाई का डर भी
उस को अभी इस आँच में तपना नहीं आता

ये अश्क-ए-मुसलसल हैं महज़ अश्क-ए-मुसलसल
हाँ नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता

तुम अपने कलेजे पे ज़रा हाथ तो रक्खो
क्यूँँ अब भी कहोगे कि तड़पना नहीं आता

मय-ख़ाने में कुछ पी चुके कुछ जाम-ब-कफ़ हैं
साग़र नहीं आता है तो अपना नहीं आता

ज़ाहिदस ख़ताओं में तो निकलूँगा न कुछ कम
हाँ मुझ को ख़ताओं पे पनपना नहीं आता

भूले थे उन्हीं के लिए दुनिया को कभी हम
अब याद जिन्हें नाम भी अपना नहीं आता

दुख जाता है जब दिल तो उबल पड़ते हैं आँसू
'मुल्ला' को दिखाने का तड़पना नहीं आता

  - Anand Narayan Mulla

Emotional Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Anand Narayan Mulla

As you were reading Shayari by Anand Narayan Mulla

Similar Writers

our suggestion based on Anand Narayan Mulla

Similar Moods

As you were reading Emotional Shayari Shayari