उलझी जो उन सेे नज़रें, उलझती ही चली गईथमी जो दिल की धड़कन थमती ही चली गईहोंठों से बरसती रही तबस्सुम बनकर चांदनीजो खुलती गई ज़ुल्फ़ें, रात गहराती चली गई— Animesh Choubey